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हाईकोर्ट : सार्वजनिक अवकाश के कारण जॉइनिंग नहीं करने वाले शिक्षक पहली वार्षिक वेतन वृद्धि के हकदार

Wed, 26 Aug 2026 03:59 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक अवकाश के कारण जॉइनिंग नहीं करने वाले शिक्षक पहली वार्षिक वेतन वृद्धि समेत अन्य सभी सेवा लाभों के हकदार हैं।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक अवकाश के कारण जॉइनिंग नहीं करने वाले शिक्षक पहली वार्षिक वेतन वृद्धि समेत अन्य सभी सेवा लाभों के हकदार हैं। वार्षिक वेतन वृद्धि की पात्रता तय करने के लिए केवल वास्तविक जॉइनिंग की तारीख को ही अंतिम और निर्णायक आधार नहीं माना जा सकता। विशेषकर तब, जब नियुक्त व्यक्ति निर्धारित तिथि पर केवल सार्वजनिक अवकाश के कारण कार्यभार ग्रहण नहीं कर सका हो।

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इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान की एकल पीठ ने पीलीभीत की सीमा रे समेत विभिन्न जिलों से जुड़ीं 17 याचिकाएं निस्तारित कर दीं। कोर्ट ने बेसिक शिक्षा विभाग को 2016 में दो जुलाई को पदभार ग्रहण करने वाले शिक्षकों को पहली वार्षिक वेतन वृद्धि का लाभ प्रदान करने पर छह हफ्ते में फैसला लेने का आदेश दिया है। साथ ही यह स्पष्ट किया है कि विभाग ऐसे शिक्षकों को केवल इस कारण पहली वार्षिक वेतन वृद्धि का लाभ देने से इन्कार नहीं कर सकता कि उन्होंने एक जुलाई के बजाय दो जुलाई को पदभार ग्रहण किया।

विभाग को याद रखना होगा कि पदभार ग्रहण करने में देरी शिक्षकों की गलती नहीं थी। उस दिन सार्वजनिक अवकाश था। लिहाजा, अधिकारी शिक्षकों के प्रत्यावेदनों पर नियुक्ति की तारीख, जॉइनिंग की तारीख और एक जुलाई को सार्वजनिक अवकाश होने की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तार्किक निर्णय लें।

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2016 में नियुक्त सहायक अध्यापकों की पहली वार्षिक वेतन वृद्धि से जुड़ा है मामला

मामला 2016 में नियुक्त सहायक अध्यापकों की पहली वार्षिक वेतन वृद्धि से जुड़ा है। याचियों की नियुक्ति 28 जून को हुई थी। एक जुलाई 2016 को सार्वजनिक अवकाश होने से उन्होंने दो जुलाई को संबंधित विद्यालयों में कार्यभार ग्रहण किया। विभाग ने उनकी पहली वेतन वृद्धि एक जुलाई 2017 से निर्धारित की थी। शिक्षकों का दावा था कि उन्हें पहली वेतन वृद्धि एक जनवरी 2017 से मिलनी चाहिए। शिक्षकों ने इसके लिए 22 दिसंबर 2016 के शासनादेश और वित्त नियंत्रक, बेसिक शिक्षा परिषद के 20 नवंबर 2025 के स्पष्टीकरण का हवाला दिया। कहा कि नियुक्ति 28 जून को हुई थी, जो दो जनवरी से एक जुलाई के बीच आती है। इसलिए पहली वेतन वृद्धि एक जनवरी 2017 से देय होनी चाहिए।

लंबे समय से आंदोलन कर रहे शिक्षक

15 हजार शिक्षक भर्ती के तहत नियुक्त सहायक अध्यापक वेतन वृद्धि से जुड़ी विसंगति को लेकर लंबे समय से धरना-प्रदर्शन और आंदोलन कर रहे थे। शिक्षकों का आरोप था कि विभागीय आदेश जारी होने के बावजूद उन्हें वास्तविक लाभ नहीं मिल सका था। उनकी मांग थी कि एक जनवरी 2017 से उनका वेतन पुनर्निर्धारित किया जाए और वर्षों से लंबित वेतन अंतर का बकाया भुगतान किया जाए।
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