पुलिस की ओर से दाखिल आरोप पत्र पर संज्ञान लेना कानूनन वर्जित है। यह एक गैर-संज्ञेय अपराध है, जिसकी कानूनी प्रक्रिया सामान्य अपराधों से भिन्न होती है। वहीं, राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल व अपर शासकीय अधिवक्ता विकास सहाय ने याचिका का विरोध किया। कहा, कानूनी स्थिति स्पष्ट है पर ट्रायल कोर्ट पुलिस के आरोप पत्र को परिवाद मानकर आगे की कार्यवाही कर सकता है।
हालांकि, कोर्ट ने याची के तर्कों को स्वीकार कर माना कि न्यायिक मजिस्ट्रेट का सीधे चार्जशीट पर संज्ञान लेना प्रक्रियात्मक रूप से गलत था। लिहाजा, कोर्ट ने याचिका स्वीकार कर न्यायिक मजिस्ट्रेट की ओर से जारी समन आदेश रद्द कर दिया।