इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से पूछा है कि समान मामलों में दर्ज कई एफआईआर की एक साथ जांच क्यों नहीं की जा रही है। जबकि, 20 अक्तूबर 2023 को पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की ओर से जारी पत्र में ऐसे मामलों की एक साथ विवेचना करने की बात कही गई है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से पूछा है कि समान मामलों में दर्ज कई एफआईआर की एक साथ जांच क्यों नहीं की जा रही है। जबकि, 20 अक्तूबर 2023 को पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की ओर से जारी पत्र में ऐसे मामलों की एक साथ विवेचना करने की बात कही गई है। एक समान मामलों की अलग-अलग विवेचना न सिर्फ जांच प्रक्रिया को जटिल बनाती है, बल्कि न्याय की राह भी कठिन हो जाती है।
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यह टिप्पणी न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति नलिन कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने ललितपुर निवासी विशाल खुराना व अन्य की याचिका पर सुनवाई के दौरान की। कोर्ट ने प्रमुख सचिव गृह से 20 जून तक व्यक्तिगत हलफनामा तलब दाखिल करने का आदेश दिया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि याचियों के खिलाफ समान मामलों में कई एफआईआर दर्ज हैं, लेकिन सभी की जांच अलग-अलग हो रही है। इससे उन्हें परेशान होना पड़ रहा है।
इस पर कोर्ट ने नाराजगी जाताई। कहा कि इससे पहले एक मई 2025 को रवि तिवारी के मामले में पुलिस महानिदेशक के 20 अक्तूबर 2023 के उस पत्र का उल्लेख किया था, जिसमें एक जैसे मामलों को जोड़कर जांच करने की बात कही गई थी। लेकिन, अब तक ऐसा नहीं हुआ है।