High court strict on giving bank guarantee cash without permission
प्रयागराज। व्यापार कर आयुक्त खंड-18 आगरा शशि भूषण सिंह द्वारा बिना कोर्ट की अनुमति के बीएसएनएल द्वारा प्रवेश शुल्क के एवज में दी गई बैंक गारंटी का भुगतान करा लेने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने आयुक्त को 30 सितंबर तक व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर आदेश की अवहेलना करने का स्पष्टीकरण मांगा है। कोर्ट ने पूछा है कि बिना अनुमति के बैंक गारंटी कैसे कैश करा ली गई। कोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई की तिथि को आयुक्त के विरुद्ध अदालत की अवमानना का आरोप निर्मित किया जाएगा।
यह आदेश न्यायमूर्ति अशोक कुमार ने मेसर्स भारत संचार निगम आगरा की याचिका पर दिया है। व्यापार कर विभाग ने याची के खिलाफ प्रवेश कर की वसूली कार्रवाई की, जिसे पुनरीक्षण याचिका में चुनौती दी गई। कोर्ट ने प्रवेश शुल्क की वसूली पर इस शर्त के साथ रोक लगा दी कि याची बैंक गारंटी देगा और समय-समय पर नवीनीकरण कराता रहेगा। यह भी कहा कि नवीनीकरण न होने पर अंतरिम आदेश स्वत: समाप्त हो जाएगा। बीएसएनएल ने बैंक गारंटी दी और नवीनीकरण भी करा रहा है। इसके बावजूद बिना याची को बताए और कोर्ट की अनुमति लिए आयुक्त ने बैंक गारंटी कैश करा ली। बैंक ने याची को सूचित किया तो उसने हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की।
कोर्ट ने कहा याचिकाएं अभी लंबित हैं, इन पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। अंतरिम आदेश न तो रद्द कराया गया और न ही संशोधित कराया गया। बिना कोर्ट की अनुमति के बैंक गारंटी कैश कराना कोर्ट के आदेश की अवहेलना है, जिसपर कोर्ट ने आयुक्त को नोटिस जारी कर कारण बताने को कहा है। याचिका की सुनवाई 30 सितंबर को होगी।