इलाहाबाद विश्वविद्यालय के संगठक कॉलेज यूइंग क्रिश्चियन कॉलेज (ईसीसी) में व्याप्त अराजकता पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जताई कि छात्रों की अराजकता से निपटने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस ने कॉलेज को कोई मदद क्यों नहीं उपलब्ध कराई है। कोर्ट ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि वह इस मामले को स्वयं संज्ञान में ले और यह सुनिश्चित करें कि स्थानीय प्रशासन कॉलेज को हर संभव मदद उपलब्ध कराए। कोर्ट ने अगली तारीख 30 मई को डीएम और एसएसपी इलाहाबाद को कोर्ट में उपस्थित रहने का भी निर्देश दिया है।
इस प्रकरण को लेकर दाखिल एक याचिका पर न्यायमूर्ति अरुण टंडन और न्यायमूर्ति पीसी त्रिपाठी की पीठ ने कहा कि ईसीसी में छात्रों ने गेट का ताला बंद कर लिया है। वहां के छात्र संगठन ने कॉलेज में पठन-पाठन ठप करा दिया है। अध्यापकों और महिला अध्यापिकाओं से छात्रों ने बदसलूकी की है। संस्थान बंद होने के कगार पर है और प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।
कोर्ट ने कहा छात्रों का काम है पढ़ना, यदि ऐसा नहीं हो रहा है तो प्रशासन भी अपनी आंख बंद नहीं रख सकता है। कोर्ट ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि वह स्वयं इस मामले में दखल देकर जिला प्रशासन की मदद सुनिश्चित कराएं और यदि कोई अधिकारी इसमें लापरवाही करता है तो उस पर बेझिझक कार्रवाई करें।
छात्र संगठनों को आंदोलन का हक, अराजकता का नहीं
खंडपीठ ने कहा कि आंदोलन करने तथा प्रदर्शन और हड़ताल का छात्र संगठनों को अधिकार है, मगर यह अधिकार अराजकता की सीमा तक नहीं जाता है। यदि परिसर में अराजकता की स्थिति बनती है तो इसके लिए जिला प्रशासन के वह अधिकारी जिम्मेदार होंगे, जिन्होंने फोर्स उपलब्ध नहीं कराई। कोर्ट ने कहा कि छात्रों की पढ़ाई पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं तो पढ़ाई गुणवत्ता परक होनी चाहिए। हड़ताल करना किसी समस्या का हल नहीं हो सकता है। मामले पर कोर्ट 30 मई को सुनवाई करेगी।