कोर्ट की कार्यवाही (सांकेतिक तस्वीर)
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हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं का नौ अगस्त को न्यायिक कार्य से विरत रहने के प्रस्ताव की सूचना बिना मुख्य न्यायमूर्ति के आदेश के प्रसारित करने पर हाईकोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। कोर्ट ने प्रधान न्यायपीठ सचिव से स्पष्ट करने के लिए कहा है कि किन परिस्थितियों में इस प्रकार का कार्य किया गया है। एक याचिका की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने यह आदेश दिया।
शुक्रवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने शिक्षा सेवा अधिकरण के गठन के मुद्दे पर न्यायिक कार्य नहीं करने का निर्णय लिया था। इससे संबंधित प्रस्ताव मुख्य न्यायाधीश को इस अनुरोध के साथ प्रेषित किया गया कि इस दिन मुकदमों में विपरीत आदेश न पारित किए जाएं। शुक्रवार को सुबह 10 बजे जब जस्टिस अग्रवाल की कोर्ट बैठी तो न्यायपीठ सचिव ने बार के प्रस्ताव की प्रति कोर्ट के सामने रखी।
कोर्ट ने देखा की बार के प्रस्ताव पर मुख्य न्यायाधीश की ओर से न तो कोई टिप्पणी लिखी गई है और न ही इसे अदालतों तक अग्रसारित करने का कोई निर्देश दिया गया है। इस बारे में पूछने पर न्यायपीठ सचिव ने बताया कि प्रस्ताव की प्रति उनको प्रधान न्यायपीठ सचिव ने भेजी है। इस पर कोर्ट ने प्रधान न्यायपीठ सचिव से स्पष्टीकरण मांग लिया है। मामले की सुनवाई 13 अगस्त को होगी।