अदालत ने सरकार की दलील मानने से किया इन्कार
याचियों के अधिवक्ता ने दलील दी कि एनसीटीई की 12 नवम्बर 2014 की अधिसूचना में बीएड को माध्यमिक स्तर के सभी अध्यापक पदों के लिए न्यूनतम योग्यता घोषित किया गया है। इसलिए राज्य सरकार इसे बदल नहीं सकती। वहीं, राज्य सरकार के अधिवक्ता ने दलील दी कि 2018 की भर्ती में बीएड योग्य अभ्यर्थियों की कमी के कारण बड़ी संख्या में पद रिक्त रह गए थे। छात्रों के हित में संशोधन कर अधिक उम्मीदवारों को अवसर देने की कोशिश की गई।
अदालत ने सरकार की दलीलों को मानने से इन्कार कर दिया। कहा कि एनसीटीई की अधिसूचना बाध्यकारी है और इसमें किसी भी प्रकार की ढील देना कानून के खिलाफ है। योग्यता में छूट देना शिक्षा की गुणवत्ता के साथ समझौता है। लिहाजा, कोर्ट ने गैर बीएड डिग्रीधारकों की नियुक्ति पर रोक लगा दी। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि भर्ती प्रक्रिया जारी रहेगी। मामले की अगली सुनवाई 16 अक्तूबर को होगी।