इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ललितपुर निवासी विनोद तिवारी उर्फ रानू और एक अन्य की गिरफ्तारी पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। साथ ही सभी प्रतिवादियों को चार सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ललितपुर निवासी विनोद तिवारी उर्फ रानू और एक अन्य की गिरफ्तारी पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। साथ ही सभी प्रतिवादियों को चार सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना की खंडपीठ ने दिया।
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याचिकाकर्ताओं ने 18 मई 2025 को ललितपुर के कोतवाली पुलिस स्टेशन में उनके खिलाफ गैंगस्टर के तहत दर्ज की गई एफआईआर को रद्द करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग करते हुए याचिका दाखिल की थी। याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि जिस मूल मामले के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई थी, उसकी जांच अनियमित जमा योजना प्रतिबंध अधिनियम 2019 के प्रावधानों के तहत होनी चाहिए।
इस मामले में स्थानीय पुलिस के पास आरोप पत्र दाखिल करने का अधिकार क्षेत्र नहीं है। अधिनियम के तहत प्रारंभिक जांच एक सक्षम प्राधिकारी की ओर से की जानी चाहिए जो मामले को केंद्र सरकार को भेज सकता है। इसके बाद केंद्र सरकार नियम अनुसार सीबीआई को जांच का निर्देश दे सकती है। स्थानीय पुलिस को मूल मामले में आगे बढ़ने और आरोप-पत्र प्रस्तुत करने का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है।