इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बिना तलाक दिए अन्य व्यक्ति के साथ रहने के मामले में पारिवारिक कोर्ट की ओर से दिए गए गुजारा भत्ता आदेश पर रोक लगा दी है। इसी के साथ पत्नी को नोटिस जारी करते हुए तीन सप्ताह में जवाब मांगा है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बिना तलाक दिए अन्य व्यक्ति के साथ रहने के मामले में पारिवारिक कोर्ट की ओर से दिए गए गुजारा भत्ता आदेश पर रोक लगा दी है। इसी के साथ पत्नी को नोटिस जारी करते हुए तीन सप्ताह में जवाब मांगा है। यह आदेश न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह ने संतोष की पुनरीक्षण अर्जी पर दिया है।
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चित्रकूट निवासी संतोष ने परिवार न्यायालय के पत्नी के लिए दो व बच्चे के लिए एक हजार रुपये गुजारा भत्ता देने के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में पुनरीक्षण अर्जी दायर की थी। याची अधिवक्ता ने दलील दी कि विपक्षी की शादी पहले किसी अन्य के साथ हुई थी। वह तलाक दिए बिना याची के साथ बतौर पत्नी रहने लगी। ऐसे में वह गुजारा भत्ता पाने की अधिकार नहीं है। कोर्ट ने मामले को विचारणीय मानते हुए गुजारा भत्ता आदेश पर रोक लगा दी। अगली सुनवाई 11 मार्च को होगी।