इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की सहायक अभियोजन अधिकारी (एपीओ) प्रारंभिक परीक्षा-2025 के परिणाम को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य परीक्षा का परिणाम घोषित करने पर रोक लगा दी है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की सहायक अभियोजन अधिकारी (एपीओ) प्रारंभिक परीक्षा-2025 के परिणाम को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य परीक्षा का परिणाम घोषित करने पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मामले में फैसला आने तक आयोग मुख्य परीक्षा का परिणाम घोषित नहीं करेगा। कोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया है।
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यह आदेश न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम ने प्रयागराज के पंकज वर्मा व दो अन्य की याचिका पर दिया है। याचिका में प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम और नौ जनवरी 2020 के कार्यालय ज्ञापन को चुनौती दी गई थी। याचियों का कहना है कि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के मेधावी आरक्षित श्रेणी (एमआरसी) के अभ्यर्थियों को अनारक्षित श्रेणी में शामिल नहीं किया गया है।
याचिका में मांग की गई है कि आयोग को एमआरसी अभ्यर्थियों को अनारक्षित श्रेणी में शामिल करते हुए प्रारंभिक परीक्षा का संशोधित परिणाम घोषित करने का आदेश दिया जाए। साथ ही इसके आधार पर मुख्य परीक्षा आयोजित करने और विभिन्न श्रेणियों के कटऑफ अंक और योग्य अभ्यर्थियों के प्राप्तांक से संबंधित रिकॉर्ड अदालत में पेश करने की मांग की गई है।
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याचियों के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि मुख्य परीक्षा संपन्न हो चुकी है। उसका परिणाम जल्द घोषित होने की संभावना है। इस पर कोर्ट ने मामले में निर्णय आने तक मुख्य परीक्षा का परिणाम घोषित नहीं करने का आदेश दिया। साथ ही सभी पक्षों को एक सप्ताह के भीतर लिखित बहस दाखिल करने को कहा है।