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हाईकोर्ट : अंतरिम आदेश के उल्लंघन पर बाद में मुकदमा खारिज होने से अवमानना की कार्यवाही खत्म नहीं होती

Wed, 30 Sep 2026 06:39 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी अंतरिम आदेश के प्रभावी रहने के दौरान उसका उल्लंघन किए जाने के आरोप में अवमानना की कार्यवाही केवल इस आधार पर समाप्त नहीं हो सकती कि संबंधित मुकदमा बाद में खारिज हो गया।
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सहारनपुर पहुंचे आशुतोष ब्रह्मचारी। - फोटो : अमर उजाला
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी अंतरिम आदेश के प्रभावी रहने के दौरान उसका उल्लंघन किए जाने के आरोप में अवमानना की कार्यवाही केवल इस आधार पर समाप्त नहीं हो सकती कि संबंधित मुकदमा बाद में खारिज हो गया। कोर्ट ने इस कानूनी पहलू पर विचार करते हुए पक्षकारों को अपना पक्ष रखने के लिए समय दिया है। 14 अक्तूबर को मामले की सुनवाई होगी।

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यह आदेश न्यायमूर्ति विकास बुधवार की एकल पीठ ने शामली निवासी आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज की अवमानना याचिका पर दिया। याचिका में सहारनपुर मंडल के आयुक्त की ओर से 27 नवंबर 2025 को पारित अंतरिम आदेश का अनुपालन नहीं किए जाने का आरोप लगाया गया है। इस आदेश के तहत सहायक रजिस्ट्रार, फर्म्स, सोसाइटीज एवं चिट्स, सहारनपुर के 28 मई 2025 के आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगाई गई थी। साथ ही सोसाइटी और ट्रस्ट की गतिविधियों पर भी रोक लगाने का निर्देश दिया गया था।

याची का आरोप है कि अंतरिम आदेश के बावजूद दूसरे पक्ष को रामलीला का आयोजन करने और उसका प्रबंधन करने की अनुमति दी गई। याची ने अदालत में दलील दी कि आदेश के प्रभावी रहने के दौरान उसका उल्लंघन किया गया था। इसलिए बाद में मूल कार्यवाही समाप्त हो जाने से कथित अवमानना का मामला खत्म नहीं हो जाता।
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राज्य सरकार की ओर से स्थायी अधिवक्ता ने दलील दी कि मूल कार्यवाही समाप्त होने के बाद अंतरिम आदेश अंतिम आदेश में समाहित हो गया। ऐसे में उस अंतरिम आदेश के उल्लंघन के आधार पर अवमानना की कार्यवाही नहीं की जा सकती। हाईकोर्ट ने नरेश चंद्र कपूर बनाम ओपीएस मलिक मामले का हवाला दिया। कहा कि किसी अंतरिम आदेश का उसके प्रभावी रहने की अवधि में उल्लंघन किया गया है तो मूल कार्यवाही बाद में खारिज हो जाने मात्र से संबंधित पक्ष उस उल्लंघन के परिणामों से बच नहीं सकता।

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