इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कर्मचारी की मौत के दो साल बाद दर्ज कराई गई प्राथमिकी पर आरोपी राजन गुप्ता उर्फ विदुप अग्रहरी की गिरफ्तारी पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने दिया है।
याची की फैक्टरी में काम करने वाले कर्मचारी की अचानक तबीयत खराब हो गई थी। अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई थी। उस समय पिता ने कर्मचारी मुआवजा अधिनियम-1923 के तहत मुआवजा स्वीकार किया था। घटना के दो साल बाद तीन सितंबर 2025 को बीएनएसएस की धारा-173(4) के तहत एक आवेदन देकर आरोप लगाया गया कि कर्मचारी की हत्या की गई थी। इसके बाद पुलिस ने गैर इरादतन हत्या के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की तो याची ने उसे रद्द करने व गिरफ्तारी पर रोक को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
याची के वरिष्ठ अधिवक्ता दिलीप कुमार व सुधांशु कुमार ने दलील दी कि दो साल तक अप्राकृतिक मृत्यु का कोई आरोप नहीं लगाया गया था। अब यह प्राथमिकी केवल रुपये वसूलने और आपराधिक कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग करने के उद्देश्य से दर्ज कराई गई है। कोर्ट ने गौर किया कि मुआवजे की स्वीकृति और लंबी अवधि के बाद रिपोर्ट दर्ज कराना मामले को संदिग्ध बनाता है। चार मई को मामले की सुनवाई होगी।