इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गैंग चार्ट की मंजूरी के लिए आयोजित संयुक्त बैठक में मिर्जापुर के डीएम पवन कुमार गंगवार के शामिल न होने पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने डीएम से स्पष्टीकरण मांगते हुए कहा कि है कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि अधिकारी कानून को बोझ समझते हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने दिया है।
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मिर्जापुर की भगमनी देवी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर गैंगस्टर एक्ट में दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की मांग की थी। याची अधिवक्ता ने दलील दी कि आरोपी के खिलाफ गैंग चार्ट को मंजूरी देने के लिए जिलाधिकारी और जिला पुलिस अधीक्षक के बीच एक संयुक्त बैठक होना अनिवार्य शर्त है। इसमें डीएम का उपस्थित न होना नियमों का उल्लंघन है।
कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि डीएम की इस लापरवाही के कारण न केवल जनता के समय और पैसे की बर्बादी हुई, बल्कि एक ऐसे अभियोजन को जन्म दिया गया जिसका भविष्य पहले से ही अधर में है। कोर्ट ने जिलाधिकारी से व्यक्तिगत स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही याचिकाकर्ता भगमनी देवी की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है। मामले की अगली सुनवाई 30 अप्रैल को होगी।