फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

High Court : 21 माह के बच्चे को मां से अलग करना अन्याय होगा. पिता की याचिका खारिज

Wed, 13 May 2026 08:49 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि 21 माह का बच्चा पूरी तरह से अपनी मां पर निर्भर होता है, इसलिए उसे मां से दूर करना अन्याय होगा। यह टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने बच्चे की अभिरक्षा मां को सौंप दी।
विज्ञापन
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि 21 माह का बच्चा पूरी तरह से अपनी मां पर निर्भर होता है, इसलिए उसे मां से दूर करना अन्याय होगा। यह टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने बच्चे की अभिरक्षा मां को सौंप दी। यह आदेश न्यायमूर्ति संदीप जैन की एकल पीठ ने मां की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर दिया है।

विज्ञापन


बलिया निवासी नाबालिग बच्चे की मां ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बच्चे की अभिरक्षा उसे सौंपने की गुहार लगाई थी। याची अधिवक्ता ने दलील दी कि कांस्टेबल पति बच्चे को याची से छीन ले गया है। मासूम बच्चे की अभिरक्षा मां को मिलनी चाहिए। पिता की ओर से दलील दी गई कि याची पत्नी की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है और वह शराब की आदी है। वह बच्चे की परवरिश करने में सक्षम नहीं है।

कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद पति की दलीलों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने पाया कि याची मां वर्तमान में अपने माता-पिता के साथ रह रही है, जो आर्थिक रूप से सक्षम हैं और बच्चे की परवरिश में मदद कर सकते हैं। कोर्ट ने बच्चे के सर्वोत्तम हित को सर्वोपरि मानते हुए निर्देश दिया कि विपक्षी पिता तीन दिन के भीतर बच्चे की अभिरक्षा उसकी मां को सौंप दे। हालांकि, पिता और पुत्र के बीच भावनात्मक संबंध बनाए रखने के लिए कोर्ट ने पिता को महीने में दो बार पुलिस स्टेशन में मुलाकात करने का अधिकार प्रदान किया है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें