इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अवैध निर्माण ध्वस्तीकरण आदेश के खिलाफ याची की अपील रात 10 बजे खारिज होने के बाद अगली सुबह छह बजे मकान तोड़ देने की कार्रवाई पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने इस मानमाना काम करार देते हुए पूछा है कि इस प्रकार की मनमानी करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही क्यों नहीं तय की जानी चाहिए।
यह भी पूछा है कि याची को अपील पर हुए आदेश को चुनौती देने का अवसर क्यों नहीं दिया गया। याचिका की अगली सुनवाई सात जनवरी को होगी। कोर्ट ने ध्वस्तीकरण कार्रवाई पर रोक लगाते हुए याची को इस दौरान मकान से अपना सामान हटा लेने की छूट दी है।
यह आदेश न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्र ने गाजीपुर निवासी शिव शंकर मिश्र की याचिका पर दिया है। याची का कहना है कि उसी कालोनी में 600 मकान है ।केवल याची के मकान को टार्गेट किया गया है।
याची के बेटे को मुख्तार अंसारी की सहायता करने का झूठा आरोप लगाकर मकान गिराया गया है। याची अधिवक्ता का कहना है कि पांच दिसंबर 20 की रात 10 बजे ध्वस्तीकरण कार्यवाही आदेश के खिलाफ याची की अपील खारिज कर दी गई और दूसरे दिन छह दिसंबर को सुबह छह बजे मकान गिराने लगे।काफी हिस्सा ढहा ेदिया गया है। याची को मकान से अपना सामान निकालने तक का मौका नहीं दिया गया।