फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

High Court : हाईकोर्ट ने बंधुआ मजदूरों को रिहाई प्रमाणपत्र व मुआवजा न देने पर सरकार से मांगा जवाब

Sat, 20 Sep 2025 05:55 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बंधुआ मजदूरों की रिहाई के मामले में प्रदेश सरकार, बागपत के डीएम, मानवाधिकार आयोग और ईंट-भट्ठा मालिकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
विज्ञापन
अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बंधुआ मजदूरों की रिहाई के मामले में प्रदेश सरकार, बागपत के डीएम, मानवाधिकार आयोग और ईंट-भट्ठा मालिकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही छह सप्ताह में जवाब दाखिल करने और दो सप्ताह में प्रत्युत्तर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके बाद सूचीबद्ध करने के लिए कहा है।

विज्ञापन


यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की एकल पीठ ने सामाजिक कार्यकर्ता निर्मल गोराना और 22 अन्य की याचिका पर दिया है। याची के अधिवक्ता चार्ली प्रकाश ने दलील दी कि बागपत के शेरपुर, लुहारी गांव में 23 मजदूरों को उनके परिवार सहित बंधुआ बनाकर रखा गया था। उन्हें बिना मजदूरी दिए दिन-रात काम कराया जाता था और पर्याप्त भोजन भी नहीं दिया जाता था। इसकी सूचना बागपत के डीएम को मिली तो उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ता निर्मल गोराना के साथ मिलकर उन मजदूरों को मुक्त कराया। हालांकि, बंधुआ मजदूरी अधिनियम के तहत उन्हें न तो मजदूरी का भुगतान किया गया और न ही उनके पुनर्वास के लिए रिहाई प्रमाणपत्र दिया गया। 

नाबालिग होने का दावा करने वाले हत्यारोपी को नहीं मिली राहत

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्यारोपी की ओर से अपनी आयु को लेकर विरोधाभासी बयान और दस्तावेज पेश करने पर उसकी याचिका में हस्तक्षेप करने से इन्कार कर दिया और याचिका भी खारिज कर दी। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ की पीठ ने फतेहपुर के हथगांव थाने में दर्ज हत्या के मामले के आरोपी की पुनरीक्षण याचिका पर दिया। फतेहपुर निवासी आरोपी ने किशोर न्याय बोर्ड में यह कहते हुए अर्जी दी थी कि उसके पास आयु को प्रमाणित करने के लिए कोई दस्तावेज नहीं है। उसकी आयु निर्धारण के लिए मेडिकल जांच कराई जाए।
विज्ञापन


जांच में उसकी आयु 19 साल पाई गई। इसके बाद आरोपी ने कक्षा नौ का दस्तावेज पेश किया जिसमें घटना के दिन उसकी आयु 18 साल बताई गई थी। हाईकोर्ट ने इन तथ्यों का अवलोकन करते हुए कहा कि आरोपी नाबालिग साबित करने के लिए विरोधाभासी स्टैंड ले रहा है। ऐसे में उसे कोई राहत देने से इन्कार करते हुए याचिका को खारिज कर दी। 

विज्ञापन

 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें