हाईकोर्ट ने कहा कि सरकारी सेवकों की सेवानिवृत्ति आयु 58 वर्ष ही है न कि 60 वर्ष। सरकार की आयु बढ़ाने संबंधी 28 नवंबर 2001 की अधिसूचना गैर विधायी है। कानून की नजर में आयु सीमा बढ़ाने संबंधी संशोधन अभी नहीं हुआ है।
भदोही औद्योगिक विकास प्राधिकरण के असिस्टेंट आर्किटेक्ट ओमप्रकाश तिवारी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल और न्यायमूर्ति इफाकत अली खान की पीठ ने दिया है।
कोर्ट का कहना है कि सरकार ने कर्मचारियों की आयु बढ़ाने का निर्णय अनुच्छेद 309 के तहत नियम बनाने की शक्ति का प्रयोग कर लिया है, जबकि आयु बढ़ाने के लिए फंडामेंटल रूल्स 56 एक विधायी नियम है।
इसे विधानसभा के जरिए ही संशोधित किया जा सकता है। सरकार नियम बनाने की शक्ति का प्रयोग कर मूल कानून में संशोधन नहीं कर सकती है। लिहाजा, सरकारी सेवकों की सेवानिवृत्ति आयु को नियम बनाकर संशोधित नहीं किया जा सकता है।