मामले के अनुसार याची प्रतीक गुप्ता की शादी पांच दिसंबर 2015 को मोनिका जिंदल से हुई थी। शादी सफल नहीं हुई और साल भर के भीतर ही विवाद शुरू हो गया। लड़की के पिता अरुण कुमार अग्रवाल ने प्राथमिक दर्ज करा दी। पुलिस ने 3 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। बाद में याची की मांग पर मामले की अग्रिम विवेचना कराई गई। दूसरे विवेचनाधिकारी ने तमाम धाराओें को समाप्त करते हुए सिर्फ आईपीसी की दहेज उत्पीड़न और दहेज उत्पीड़न अधिनियम की दो धाराओं में संपूरक चार्जशीट दाखिल की।
याची अधिवक्ता का कहना था कि मजिस्ट्रेट को संपूरक चार्जशीट के आधार पर डिस्चार्ज पर सुनवाई का अधिकार है और यदि केस सत्र न्यायालय में विचारणीय है तो मजिस्ट्रेट को सम्मन करने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने इस दलील को सही नहीं माना। कोर्ट ने कहा कि मजिस्ट्रेट को चार्जशीट को संज्ञान लेने से रोकने का कोई कानून नहीं है। वह संज्ञान में लेकर केस सत्र न्यायालय को भेज देगा और विचारण सत्र न्यायालय में होगा।