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Prayagraj: 'संदेह को दरकिनार कर किसी को नहीं दी जा सकती उम्रकैद', एक मामले की सुनवाई में हाईकोर्ट का फैसला

Tue, 07 Apr 2026 11:16 PM IST
Akash Dubey अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

प्रयागराज हाईकोर्ट ने मेरठ के हत्या मामले में उम्रकैद पाए विनोद को बरी कर दिया। कोर्ट ने संदेह और गवाहों के विरोधाभासी बयानों को आधार बनाया। 
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इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्या में उम्रकैद पाए आरोपी को बरी कर दिया। कहा कि संदेह और गवाहों के विरोधाभासी बयानों को दरकिनार कर किसी को उम्रकैद की सजा नहीं दी जा सकती। यह फैसला न्यायमूर्ति चंद्रधारी सिंह और न्यायमूर्ति देवेंद्र सिंह प्रथम की खंडपीठ ने आजीवन कारावास पाए विनोद की अपील स्वीकार करते हुए दिया।

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 कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की सजा को रद्द कर दिया। मामला मेरठ के सरूरपुर थाना क्षेत्र का है। छह जून 2009 को 13 वर्षीय किशोरी चंचल की गला घोंटकर हत्या कर दी गई थी। अभियोजन का आरोप था कि पड़ोसी विनोद ने उसे चाय बनाने के बहाने बुलाया और हत्याकर शव को ईंटों के ढेर के पीछे फेंक दिया। 2015 में मेरठ की सत्र अदालत ने विनोद को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जिसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दाखिल की। 

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि मामले के सभी मुख्य गवाह मृतका के रिश्तेदार थे। मृतका के चाचा और अन्य रिश्तेदारों के बयानों में समय-घटनाक्रम को लेकर विरोधाभास था। एक ओर गवाहों ने कहा कि उन्होंने आरोपी को भागते हुए देखा, लेकिन उन्होंने शव को घसीटने के निशान के बारे में कुछ नहीं कहा। इससे बयान की में संदेह पैदा हुआ। 
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कोर्ट ने माना कि शुरुआती एफआईआर में किसी को नामजद नहीं किया गया था। बाद में टुकड़ों में जानकारी जोड़कर आरोपी को फंसाने की कोशिश की गई। लिहाजा, कोर्ट ने आरोपी को बरी करने का फैसला सुनाया। कहा कि यह साक्ष्यहीन मामला है। परिस्थितिजन्य साक्ष्य की दृष्टि से देखें तो घटनाक्रम की कड़ियां जुड़ती नहीं प्रतीत हो रही। ऐसी दशा में महज संदेह के आधार पर किसी को दोषी मान कर सजा नहीं दी जा सकती।

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