कोर्ट ने दिए सुझाव
दुष्कर्म की सूचना मिलते ही समन्वित कार्रवाई हो। पीड़िता को गर्भावस्था जांच की नियमित सुविधा और विकल्पों की जानकारी दी जाए। यदि बच्चे का जन्म हो जाता है तो मां और नवजात के स्वास्थ्य, देखभाल और कल्याण की समुचित व्यवस्था हो। गोद देने की स्थिति में उसे भी एसओपी का हिस्सा बनाया जाए। गर्भ समापन की स्थिति में भ्रूण को साक्ष्य के रूप में सुरक्षित रखने का प्रावधान हो। नोडल अधिकारी, परामर्शदाता, परिवीक्षा अधिकारी और चिकित्सा विशेषज्ञों की संयुक्त व्यवस्था की जाए। कोर्ट ने प्रदेश के प्रमुख सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को तीन सप्ताह में विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई 13 मार्च को होगी।