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हाईकोर्ट ने कहा : भूमि मालिकों को विक्रय विलेख के लिए बाध्य नहीं कर सकता राज्य

Thu, 30 Nov 2023 12:59 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

याची सौरभ शर्मा और अन्य का कहना था कि एयरपोर्ट निर्माण के लिए सरकार उनकी जमीनों को जबरदस्ती अधिग्रहीत करना चाहती है। इसके लिए उनकी जमीन का विक्रय विलेख निष्पादित करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।
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अदालत। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार भूमि मालिक को जमीन के विक्रय विलेख के निष्पादन के लिए बाध्य नहीं कर सकता। हालांकि, सरकार भू अधिग्रहण के लिए प्रक्रिया का पालन करने के लिए स्वतंत्र है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति डोनाडी रमेश की खंडपीठ ने ललितपुर में एयरपोर्ट निर्माण के लिए ली जा रही जमीनों से जुड़े मामलों को निस्तारित करते हुए यह फैसला दिया।

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याची सौरभ शर्मा और अन्य का कहना था कि एयरपोर्ट निर्माण के लिए सरकार उनकी जमीनों को जबरदस्ती अधिग्रहीत करना चाहती है। इसके लिए उनकी जमीन का विक्रय विलेख निष्पादित करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। सरकार की ओर से अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता राजीव गुप्ता ने बताया कि 99 फीसदी किसानों ने जमीनों के स्थानांतरण की सहमति दे दी है। केवल याची ही विरोध कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि याची बातचीत के आधार पर जमीन देने को तैयार नहीं होते तो कानूनी प्रक्रिया के अनुसार अधिग्रहण किया जाएगा। कोर्ट ने इस दलील पर असहमति जाहिर करते हुए कहा कि सरकार किसी व्यक्ति को उसकी जमीन का विक्रय विलेख करने के लिए बाध्य नहीं कर सकती। बिना स्वतंत्र सहमति के विक्रय विलेख का निष्पादन गैरकानूनी है। कोर्ट ने कहा कि भू अधिग्रहण के लिए सरकार नियमित प्रक्रिया का पालन करने के लिए स्वतंत्र है।

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