इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा, महाकुंभ में गंगा-यमुना के पांटून पुलों पर लगने वाले साल स्लीपर और साल एजिंग की टेंडर प्रक्रिया में मेला प्रशासन ने कोई मनमानी नहीं की है। यह टिप्पणी कर कोर्ट ने चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। कहा, याची फर्म अधिकारियों पर आरोप सिद्ध करने में विफल रही। यह आदेश न्यायमूर्ति शेखर बी.सर्राफ व न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने साल स्लीपर और साल एजिंग की आपूर्ति करने वाली फर्म मेसर्स बंगाल वुड एंड अलाइड प्रोडक्ट्स की ओर से दाखिल याचिका पर दिया है। याची फर्म ने नियमों की अनदेखी कर अपात्र कंपनी को माल की आपूर्ति करने का ठेेका देने का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
याची फर्म के अधिवक्ता शशि नंदन और उदयन नंदन ने दलील दी कि याची फर्म पिछले छह वित्तीय वर्षों में यूपी सरकार को पर्याप्त मात्रा में गुणवत्तापूर्ण साल स्लीपर की आपूर्ति की है। वह अनुभवी भी है। यह भी दलील दी कि ठेका पाने वाली धोरामनाथ ट्रेडर्स, श्रद्धा टिंबर स्टोर्स और वसंत टिंबर मार्ट नामक तीन संस्थाओं के स्टॉक का सत्यापन किए बिना अनुबंध कर लिया गया है। जबकि, सहायक रेंज अधिकारी, रायपुर, छत्तीसगढ़ की 24 जून, 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक इन फर्मों के पास केवल 386.878 घन मीटर का स्टॉक उपलब्ध था।
10 जुलाई, 2024 को रेंज अधिकारी, वन रेंज, रायपुर, छत्तीसगढ़ ने पत्र जारी कर स्टॉक के सत्यापन के लिए पुन: निरीक्षण किए जाने की जरूरत बताई है। 31 जुलाई, 2024 को प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने प्रभागीय वन अधिकारी, रायपुर छत्तीसगढ़ की अध्यक्षता में जांच समिति गठित कर सात दिनों के भीतर रिपोर्ट तलब की थी। इससे पहले ठेका अनुबंध हो गया, जो मनमाना और अवैधानिक है।