महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव को कोर्ट ने दिए सुझाव
कोर्ट ने महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रधान सचिव को 2017 के विवाह पंजीकरण के नियम में संशोधन में कुछ सुझाव भी दिए हैं। कहा, विवाह के लिए धार्मिक रीतिरिवाज व अनुष्ठान का स्पष्ट उल्लेख किया जाए। विवाह अधिकारियों को आपत्तियां उठाने, संदेह के आधार पर आवेदन अस्वीकार करने और रिकॉर्ड बनाए रखने का अधिकार दिया जाए। साथ ही फर्जी प्रमाणपत्रों को रोकने के लिए पुजारियों/संस्थाओं को विनियमित करने के लिए कानून बनाया जाए।
विवाह कराने वाली संस्थाओं की जवाबदेही के लिए आयु और निवास प्रमाणपत्र की फोटोकॉपी रखना अनिवार्य किया जाए। फर्जी आयु दस्तावेज को रोकने के लिए पंजीकरण के साथ ऑनलाइन आयु सत्यापन प्रणाली बनाई जाए। विवाह पंजीकरण के लिए वर वधु का आधार प्रमाणीकरण किया जाए। दोनों पक्षों और गवाहों का बायोमीट्रिक डाटा, फोटो, सीबीएसई, यूपी बोर्ड, पैन, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस जैसे आधिकारिक पोर्टल से आयु का सत्यापन किया जाए। इसके अलावा भागकर शादी करने वाले जोड़ों के वीडियो, फोटो को भी विवाह पंजीकरण में शामिल किया जाए।