मृतक सेवा नियमावली राशन वितरण प्रणाली में नहीं होती लागू
कोर्ट ने कहा कि याची विवाहिता पुत्री है और दूसरे गांव की रहने वाली है। इसलिए वह मृतक आश्रित कोटे में लाइसेंसी मृत पिता के राशन की दुकान का लाइसेंस पाने के योग्य नहीं है। कोर्ट ने कहा कि मृतक आश्रित सेवा नियमावली राशन वितरण प्रणाली के मामले में लागू नहीं होगी। खंडपीठ ने एकलपीठ के अविवाहित पुत्री को परिवार की परिभाषा में शामिल करने को वैध करार देने के फैसले को सही माना और हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
याची का तर्क था कि उसके पिता नेकराम इटावा के नेवादी खुर्द गांव में सस्ते गल्ले के दुकानदार थे। उनकी मौत के बाद विधवा पत्नी सुमन देवी ने आश्रित कोटे में दुकान आवंटन की अर्जी दी। बाद में स्वयं को असमर्थ बताते हुए सुमन ने अपनी विवाहिता पुत्री के नाम आवंटन करने की अर्जी दी। एसडीएम की अध्यक्षता में गठित समिति ने विधवा पत्नी की अर्जी खारिज कर दी और पुत्री को स्थानीय निवासी न होने तथा विवाहित होने के कारण दुकान पाने के लिए अयोग्य करार दिया।