याचिका पर अधिवक्ता चंद्रकांत त्रिपाठी सहित कई अधिवक्ताओं ने बहस की। भारत सरकार की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजीआई) शशि प्रकाश सिंह व प्रदेश सरकार की तरफ से शासकीय अधिवक्ता एके संड ने कोर्ट को सहयोग किया। कोर्ट ने पासपोर्ट जारी करने या नवीनीकरण अर्जी तय करने में देरी को लेकर दाखिल याचिकाओं पर स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी, जो उपलब्ध नहीं कराई जा सकी।
कोर्ट ने कहा पासपोर्ट प्राधिकारी न्यायिक विवेक का इस्तेमाल करें तो समयबद्ध तरीके से अर्जियां निस्तारित की जा सकती है। ऐसा न करने के कारण हाईकोर्ट में भारी संख्या में याचिकाएं आ रही है। निर्देशों के बावजूद समस्या का निराकरण नहीं हो पा रहा। ई-गवर्नेंस नीति के तहत यदि कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, कार्यकुशलता से ऐसी अर्जियां समय से तय की जा सकती है।
संबंधित अदालत को अनुमति देने का अधिकार
कोर्ट ने कहा है कि जिस अदालत के अधिकार क्षेत्र में विवेचना या ट्रायल चल रहा है, उसी अदालत को अभियुक्त की विदेश जाने की अनुमति की अर्जी तय करने का अधिकार है। अदालत को शर्तें तय करने का भी अधिकार है। एएसजीआई ने स्वयं ही आश्वस्त किया कि रीजनल पासपोर्ट अधिकारी एनसीआर केस दर्ज होने पर पासपोर्ट जारी करने या नवीनीकरण की अर्जी को नहीं रोकेंगे और यथाशीघ्र आदेश जारी कर दिया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि जहां ट्रायल शुरू होने से पहले आपराधिक केस की विवेचना या जांच जारी है, अदालत को अनुमति देने या न देने का विवेकाधिकार है। वह देखेगा कि अभियुक्त विवेचना में सहयोग कर रहा है या नहीं।
ऑनलाइन रिपोर्ट भेजने का विकल्प हो
पुलिस सत्यापन रिपोर्ट को लेकर कोर्ट ने कहा है कि पुलिस रिपोर्ट आनलाइन भेजने का भी विकल्प दिया जाए। तय फार्मेट पर पुलिस एनसीआर या एफआईआर का संक्षिप्त ब्योरा भी दे। पुलिस रिपोर्ट मिलते हैं रीजनल पासपोर्ट अधिकारी सूचना वेब पोर्टल पर अपलोड करें। साथ ही आवेदक को मोबाइल फोन पर मैसेज भेजने की सुविधा दी जाए। यह भी बताया जाए कि आवेदक अदालत से विदेश जाने की अनुमति प्राप्त कर सूचित करें। इस संबंध में केंद्र सरकार को भी निर्देशित किया है।
कोर्ट ने रीजनल पासपोर्ट ऑफिस को निर्देशित किया कि पुलिस रिपोर्ट की सूचना प्राप्त होने के एक हफ्ते में आवेदक को सूचित करें ताकि अगले आठ हफ्ते में वह अदालत से अनुमति प्राप्त कर सके। अदालत की अनुमति की सूचना मिलने के एक हफ्ते में पासपोर्ट जारी या नवीनीकृत किया जाय। कोर्ट ने कहा ये अतिरिक्त निर्देश है, जो पिछले निर्देशों को प्रभावित नहीं करेंगे।