याची की ओर से तर्क दिया गया कि अथॉरिटी ने 2011 में 50 हजार स्क्वॉयर मीटर कामर्शियल भूमि लीज पर देने के लिए टेंडर निकाला था। याची ने सबसे ऊंची बोली लगाई और 62 करोड़, नौ लाख, 59 हजार, 254 रुपये की राशि विभिन्न किश्तों में जमा कर दी। लेकिन प्रतिवादी अथॉरिटी ने पट्टा विलेख निष्पादित नहीं किया था।
याची ने पट्टा आवंटन को रद्द करने और पूरी राशि को वापस करने की मांग की। कोर्ट ने कहा कि प्रतिवादी अपने दायित्वों के निर्वहन करने में असफल रहे हैं। इसलिए याची अपने द्वारा जमा की गई रकम को पाने का हकदार है।