बीएसए ने खारिज कर दिया था दावा
इसी आधार पर बीएसए ने याची का दावा खारिज कर दिया।इसके खिलाफ याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याची के अधिवक्ता अनुराग त्रिपाठी व आदित्य शुक्ल ने दलील दी कि याची का पहला आवेदन पांच साल के भीतर दिया गया था। लेकिन, उस व्यक्त याची नाबालिग थी। वयस्कता आयु प्राप्त करने के बाद दिया आवेदन बालिग होने के बाद का है। याची के पिता गंभीर रूप से बीमार हैं और घर की आर्थिक हालत बेहद खराब है।
कोर्ट ने शासन के विशेष सचिव व बीएसए झांसी के आदेश को रद्द कर तीन माह में नियुक्ति प्रदान करने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि पहले आवेदन के वक्त याची नाबालिग थी। इसलिए उसे आवेदन में देरी के लिए छूट देने के साथ ही मृतक आश्रितों की आर्थिक हालत पर भी विचार किया जाना चाहिए।