कोर्ट ने कहा कि एक बलात्कारी न केवल पीड़िता की गोपनीयता और व्यक्तिगत अखंडता का उल्लंघन करता है, बल्कि उसे मानसिक चोट भी देता है। बलात्कार केवल एक शारीरिक हमला नहीं है, यह अक्सर पीड़िता के पूरे व्यक्तित्व को नष्ट कर देता है। एक हत्यारा अपने शिकार से भौतिक शरीर को नष्ट कर देता है, परंतु एक बलात्कारी असहाय महिला की आत्मा को नीचा दिखाता है। हाईकोर्ट ने रेप के आरोपी की जमानत अर्जी को अपनी इन टिप्पणियों के साथ खारिज दिया।
आरोपी के खिलाफ एक महिला ने नशीली कोल्ड ड्रिंक पिलाकर रेप करने और अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने की धमकी देने का केस दर्ज कराया था। आरोपी की तरफ से बचाव में दलील दी गई थी कि घटना के 17 दिन बाद एफ आईआर दर्ज कराई गई है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि भारत के ग्रामीण इलाकों की जो हालत है उसमें घटना के तुरंत बाद पुलिस स्टेशन जाकर केस दर्ज कराने की उम्मीद नहीं की जा सकती और आरोपी को सिर्फ देरी के आधार पर कोई राहत नहीं दी जा सकती। घटना 23 जून 2021 की है। इस मामले में 9 जुलाई को रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।