फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूपी : हाईकोर्ट का अहम फैसला- महज जाति के आधार पर नहीं बनता एससी/एसटी एक्ट का मामला, प्रधानाचार्य को बड़ी राहत

Sun, 11 Oct 2026 06:30 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

स्कूल से लौट रहे छात्र की मौत के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जौनपुर के प्रधानाचार्य को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने उनके खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत दर्ज मुकदमे और आपराधिक कार्यवाही को रद्द करते हुए कहा कि केवल पीड़ित के अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति समुदाय से होने के आधार पर इस कानून के तहत अपराध नहीं बनता। इसके लिए अपराध का जाति के कारण किया जाना भी आवश्यक है।

विज्ञापन
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्कूल से लौट रहे छात्र की मौत के मामले में प्रधानाचार्य के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत दर्ज मुकदमे को रद्द कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल पीड़ित के एससी/एसटी समुदाय से होने के आधार पर इस कानून के तहत अपराध नहीं बनता। इसके लिए अपराध का पीड़ित की जाति के कारण किया जाना भी आवश्यक है।

यह आदेश न्यायमूर्ति संतोष राय की एकल पीठ ने जौनपुर में तैनात प्रधानाचार्य रमाकांत यादव की आपराधिक अपील पर दिया। मामला जौनपुर के मीरागंज थाना क्षेत्र का है। नौ सितंबर 2023 को छात्र आयुष साइकिल से स्कूल गया था। दोपहर चार बजे उसके पिता हीरालाल सरोज को सूचना मिली कि उनका बेटा सीढ़ियों से गिरकर बेहोश हो गया है। मौके पर पहुंचने पर आयुष एक तख्त पर पड़ा मिला। उसे डॉक्टर के पास ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।

विज्ञापन


पिता ने आशंका जताई थी कि उनके बेटे को करीब एक घंटे तक धूप में खड़ा रखा गया था। उन्होंने प्रधानाचार्य और स्कूल प्रबंधन की भूमिका पर संदेह जताते हुए उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने विवेचना के बाद एससी/एसटी एक्ट के तहत भी आरोपपत्र दाखिल कर दिया। इसके खिलाफ प्रधानाचार्य ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

Trending Videos
विज्ञापन

गवाहों के बयान में मिले विरोधाभास

कोर्ट ने विवेचना के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और घटनास्थल के नक्शे का परीक्षण किया। कोर्ट ने पाया कि वादी हीरालाल प्रत्यक्षदर्शी नहीं थे। गवाहों के बयानों में छात्र के साइकिल से आते समय गिरने की बात सामने आई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर पर एक चोट मिली थी और मौत का कारण सिर की चोट बताया गया था। पंचनामा में भी गवाहों ने मौत का कारण गिरना बताया था। कोर्ट ने माना कि प्रधानाचार्य पर लगे आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त और विश्वसनीय साक्ष्य नहीं थे।

कोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला दिया। कहा कि संबंधित अपराध के लिए यह आवश्यक है कि अपराध पीड़ित की जाति के कारण किया गया हो। मौजूदा मामले में ऐसे तथ्य सामने नहीं आए। लिहाजा, कोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए समन आदेश और आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें