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प्रयागराज : किरण रिजिजू के बयान से भड़के हाईकोर्ट के अधिवक्ता, फूंका पुतला

Wed, 24 Nov 2021 12:07 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
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पश्चिमी यूपी में हाईकोर्ट की पीठ के केंद्रीय कानून मंत्री के बयान के विरोध में हाईकोर्ट चौराहे पर पुतला फूंकते अधिवक्ता। अमर उजाला। - फोटो : prayagraj
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केंद्रीय विधि व न्याय मंत्री किरण रिजिजू के पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट की खंडपीठ के गठन संबंधी बयान पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता आक्रोशित हो गए हैं। वकीलों ने आम सभा  कर केंद्रीय मंत्री के बयान न केवल कड़ी निंदा की, बल्कि ऐसे किसी प्रस्ताव का पूरी ताकत से विरोध करने का एलान किया। वहीं हाईकोर्ट बार एसोसिएशन का प्रभार देख रही एल्डर कमेटी ने बयान जारी कर इसे बचकाना व राजनीति से प्रेरित बयान करार दिया है। मामले को लेकर कमेटी संघर्ष समिति बनाएगी।

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एल्डर कमेटी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि जब भी आम चुनाव नजदीक आते हैं, राजनीतिक लोगों द्वारा इस प्रकार के भ्रामक बयान दिए जाते हैं। जोकि एक राजनीतिक स्टंट के अलावा और कुछ नहीं होता है। ऐसा सिर्फ कुछ खास जिलों के मतदाताओं को लुभाने के इरादे से किया जाता है। यह आगरा और मेरठ की बार एसोसिएशन के बीच मतभेद पैदा करने की भी कोशिश है, क्योंकि मेरठ में भी हाईकोर्ट की बेंच गठित करने की मांग हो रही है। 

कानून मंत्री को होनी चाहिए विधिक स्थिति की जानकारी 
एल्डर कमेटी का कहना है कि हाईकोर्ट की कोई भी खंडपीठ बिना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की सहमति के नहीं बन सकती है और उनकी ओर से ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है। कानून मंत्री के पद पर बैठने वाले व्यक्ति से इस विधिक स्थिति की जानकारी होने की अपेक्षा की जाती है।
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कमेटी का कहना है कि हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का पहले दिन से यह स्टैंड रहा है कि हाईकोर्ट की एक और पीठ गठित करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि पहले से ही लखनऊ में एक पीठ है। एल्डर कमेटी का कहना है कि उत्तराखंड के गठन के बाद वहां अलग हाईकोर्ट का गठन हो चुका है।

कमेटी का कहना है कि न्यायपालिका के विकेंद्रीकरण की परिणति केंद्र और राज्य के स्तर पर भ्रष्टाचार के रूप में ही हुई है। वास्तव में सर्वोच्च न्यायालय की पीठें गठित करने की आवश्यकता है न कि हाईकोर्ट की। एल्डर कमेटी ने इस मामले में एक संघर्ष समिति के गठन की घोषणा की है, जो मौजूदा हालात में संघर्ष की रूप रेखा तय करेगी। 

वकीलों ने आम सभा कर की मंत्री के बयान की निंदा

वहीं दूसरी ओर इसी मुद्दे पर वकीलों की आम सभा लाइब्रेरी हॉल में हुई, जिसमें किरण रिजिजू के बयान की निंदा करते हुए वकीलों ने इसे गैर जिम्मेदाराना और असांविधानिक करार दिया। कहा गया कि सरकार न्यायपालिका में रिक्तियों को भरने के बजाय राजनीतिक बयानबाजी में उलझी है, जिससे आम जनता को न्याय मिलना और दूभर होता जा रहा है।

अमरेंद्र नाथ सिंह ने कहा कि जिस जसवंत सिंह कमीशन के आधार पर बयान दिया गया है, वह रिपोर्ट उत्तराखंड राज्य के गठन के बाद अब निरर्थक हो चुकी है। कहा कि न्यायालयों में त्वरित न्याय के लिए उच्च न्यायालय व जनपद न्यायालयों में विगत कई वर्षों से लगभग 30 प्रतिशत रिक्तियों को तत्काल भरा जाए। पूर्व अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता राधाकांत ओझा ने भी केंद्रीय मंत्री के बयान की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि न्यायपालिका का विभाजन इसे कमजोर करने के सिवाय और कुछ नहीं है।

हाईकोर्ट के अधिवक्ता इसे कभी स्वीकार नहीं करेंगे। पूर्व अध्यक्ष आई के चतुर्वेदी ने केंद्रीय मंत्री के बयान की निंदा करते हुए एल्डर कमेटी से मांग की है कि हाईकोर्ट के बंटवारे को रोकने के लिए आंदोलन की ठोस रणनीति तैयार करें। हाईकोर्ट में वकालत कर रहे अधिवक्ता कानून मंत्री के बयान से काफी आहत हैं और यदि उन्होंने अपना बयान वापस नहीं लिया तो अधिवक्ता इसका पुरजोर विरोध करेंगे।

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