इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हमीरपुर के एक पॉक्सो मामले में करीब 80 वर्षीय स्वामी दीन को बरी कर दिया। ट्रायल कोर्ट ने 10 दिसंबर 2025 को उन्हें पॉक्सो मामले में दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हमीरपुर के एक पॉक्सो मामले में करीब 80 वर्षीय स्वामी दीन को बरी कर दिया। ट्रायल कोर्ट ने 10 दिसंबर 2025 को उन्हें पॉक्सो मामले में दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।
विज्ञापन
न्यायमूर्ति संतोष राय की एकल पीठ ने अपील पर सुनवाई करते हुए कहा कि एफआईआर दर्ज कराने में पांच दिन की देरी का अभियोजन पक्ष संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे सका। मूल एफआईआर में यौन अपराध का आरोप नहीं था, जबकि बाद में गंभीर धाराएं जोड़ी गईं। पीड़िता की मां के बयान में विरोधाभास हैं। इससे बच्ची को सिखाए-पढ़ाए जाने की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता।
सीआरपीसी की धारा-164 के बयान में भी पहचान और घटना के समय को लेकर गंभीर विसंगतियां मिलीं। चिकित्सा और फॉरेंसिक साक्ष्य से अभियोजन की कहानी की पुष्टि नहीं हुई। हाईकोर्ट ने कहा कि गंभीर पॉक्सो मामलों में साक्ष्य सर्वोत्तम गुणवत्ता का होना चाहिए। इसी के साथ संदेह का लाभ देते हुए अदालत ने दोषसिद्धि रद्द कर आरोपी की तत्काल रिहाई का आदेश दिया।