आईआईएफएल ने याचिका में गलत जानकारी दी
न्यायाधिकरण ने आदेश दिया था कि मकान पर कब्जा लेने से पहले 15 दिन का नोटिस दिया जाना है। इसके बावजूद परिवार को बिना किसी नोटिस के बेघर कर दिया गया। कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद पाया कि आईआईएफएएल ने याचिका में गलत जानकारी दी थी। कंपनी ने याचिका में दावा किया था कि उधारकर्ता ने डीआरटी या डीआरएटी कोई वाद दाखिल नहीं किया है जबकि यह दावा पूरी तरह से झूठा साबित हुआ। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जो व्यक्ति स्वच्छ हाथों के साथ अदालत नहीं आता, उसे कोई राहत नहीं मिल सकती। झूठ के आधार पर व्यक्ति को अदालत में आने का कोई अधिकार नहीं है। ऐसे व्यक्ति को मुकदमे के किसी भी चरण से बाहर किया जा सकता है।
यह टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने अपना 28 अगस्त 2025 का आदेश वापस ले लिया। कोर्ट ने आईआईएफएल और गाजियाबाद के जिला मजिस्ट्रेट को तत्काल प्रभाव से प्रतिवादी सरिता यादव व रामबीर यादव को उनके निवास का कब्जा वापस दिलाने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई नाै अक्तूबर को होगी। उस दिन याची कंपनी को कोर्ट ने आदेश के अनुपालन का हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। प्रतिवादी अधिवक्ता डॉ. अवनीश त्रिपाठी ने बताया हाईकोर्ट के आदेश के बाद गाजियाबाद में उधारकर्ता सरिता यादव, रामबीर यादव को शाम सात बजे मकान पर कब्जा दे दिया गया है।