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High Court : हाईकोर्ट ने वारंट तामील न होने पर पुलिस प्रशासन को लगाई फटकार, मांगी रिपोर्ट

Sat, 14 Feb 2026 06:29 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आपराधिक अपीलों में जारी गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) के निष्पादन में पुलिस की लापरवाही पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि वारंट का तामील न होना न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डाल रहा है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आपराधिक अपीलों में जारी गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) के निष्पादन में पुलिस की लापरवाही पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि वारंट का तामील न होना न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डाल रहा है। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति सलिल कुमार राय और न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह की खंडपीड ने दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ विभाग की ओर से की गई कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।

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हापुड़ के कौशल किशोर को हत्या के मामले में दाखिल अपील पर जमानत मिली थी। इसके बाद से वह और उसका वकील कोर्ट में हाजिर नहीं हो रहा था। इसका संज्ञान लेकर कोर्ट ने अपीलकर्ता कौशल के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था। पुलिस की ओर वारंट का तामील कराने में बरती गई लापरवाही पर कोर्ट ने अधिकारियों को तलब कर हलफनामा मांगा था।

सुनवाई के दौरान हापुड़ के पुलिस अधीक्षक व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित हुए। वहीं, गौतमबुद्ध नगर की पुलिस आयुक्त वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुईं। पुलिस आयुक्त ने हलफनामा दायर कर वारंट तामील कराने में विफल रहने वाले पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई का विवरण दिया। संबंधित सब इंस्पेक्टर, सीनियर सब इंस्पेक्टर और अन्य पुलिस कर्मियों ने भी अपने हलफनामे दाखिल किए।
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कोर्ट ने पाया कि पुलिस कर्मियों की ओर से दिए गए हलफनामे केवल माफीनामे की तरह हैं। इसमें वारंट के तामील होने का कारण नहीं बताया गया। कोर्ट ने चिंता जताई कि पुलिस के इस रवैया से भरोसा नहीं होता कि भविष्य में वारंट का जिम्मेदारी से निष्पादन किया जाएगा। दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू होने के चलते कोर्ट ने कोई कठोर कदम नहीं उठाया है। हालांकि, विभागीय कार्यवाही की रिपोर्ट 23 मार्च को प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। 

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