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High Court : ग्राम विकास अधिकारी के खिलाफ वसूली का आदेश रद्द, फिर से निर्णय लेने के लिए भेजा

Sat, 14 Feb 2026 06:26 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मिर्जापुर के लालगंज विकास खंड के ग्राम विकास अधिकारी से 26 हजार रुपये की वसूली के आदेश को निरस्त कर मामले को पुनः निर्णय के लिए संबंधित प्राधिकारी को वापस भेज दिया है।
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अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मिर्जापुर के लालगंज विकास खंड के ग्राम विकास अधिकारी से 26 हजार रुपये की वसूली के आदेश को निरस्त कर मामले को पुनः निर्णय के लिए संबंधित प्राधिकारी को वापस भेज दिया है। कोर्ट ने कहा कि बिना समुचित सूचना और जवाब का अवसर दिए पारित आदेश प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। यह आदेश न्यायमूर्ति विकास बुधवार की एकल पीठ ने मंगल सिंह की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।

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याची का आरोप है कि वह 21 फरवरी 2018 को मिर्जापुर के लालगंज विकास खंड में ग्राम विकास अधिकारी के पद पर नियुक्त हुए थे। अनियमितता के आरोप में गठित तीन सदस्यीय समिति की रिपोर्ट के आधार पर आठ दिसंबर 2025 को मिर्जापुर के उप श्रमायुक्त (श्रम एवं रोजगार) ने 26 हजार रुपये की वसूली का आदेश पारित कर दिया। इसके बाद 17 दिसंबर 2025 को मिर्जापुर के कोन खंड विकास अधिकारी ने वसूली आदेश जारी कर दिया। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि तीन सदस्यीय समिति की रिपोर्ट के आधार पर बिना कारण बताओ सूचना दिए वसूली का आदेश पारित कर दिया गया, जो विधि विरुद्ध है। साथ ही आरोप मुख्य रूप से अन्य अधिकारी पर थे, लेकिन दायित्व याची पर डाल दिया गया।

शासकीय अधिवक्ता ने दलील कि 13 नवंबर 2024 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था पर याची ने इसका जवाब नहीं दिया। कोर्ट ने कहा कि अभिलेखों से यह साबित नहीं होता कि याची को ठीक से सूचना दी गई थी। कोर्ट ने आठ दिसंबर 2025 को मिर्जापुर के उप श्रमायुक्त (श्रम एवं रोजगार) और 17 दिसंबर 2025 को मिर्जापुर के कोन खंड विकास अधिकारी दोनों के आदेश को निरस्त करते हुए मामले को संबंधित प्राधिकारी को पुनः विचार के लिए भेज दिया।

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