इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अवैध गिरफ्तारी और कानूनी प्रक्रिया की अनदेखी पर याची के खिलाफ पारित रिमांड आदेश निरस्त कर दिया। साथ ही न्यायमूर्ति सिद्धार्थ व न्यायमूर्ति जयकृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने उसे तत्काल हिरासत से रिहा करने का निर्देश दिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अवैध गिरफ्तारी और कानूनी प्रक्रिया की अनदेखी पर याची के खिलाफ पारित रिमांड आदेश निरस्त कर दिया। साथ ही न्यायमूर्ति सिद्धार्थ व न्यायमूर्ति जयकृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने उसे तत्काल हिरासत से रिहा करने का निर्देश दिया है।
विज्ञापन
गौतमबुद्ध नगर के अभिषेक रावत और अन्य ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर अवैध हिरासत से मुक्त किए जाने की मांग की। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि गिरफ्तारी बिना वैधानिक प्रक्रिया अपनाए की गई। न तो गिरफ्तारी के आधार बताए गए और न ही रिमांड आदेश पारित करते समय आवश्यक तथ्यों पर विचार किया गया। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के दिए गए निर्देशों के विपरीत है।
यह भी दलील दी कि याची को सोनमर्ग (जम्मू-कश्मीर) से गिरफ्तार किया गया, जबकि रिकॉर्ड में गिरफ्तारी गौतमबुद्ध नगर दिखाई गई। राज्य की ओर से पेश अपर शासकीय अधिवक्ता ने रिकॉर्ड के आधार पर पुलिस कार्रवाई का समुचित बचाव नहीं कर सके।
विज्ञापन
इस पर कोर्ट ने 13 अक्तूबर 2025 का रिमांड आदेश रद्द कर तत्काल रिहाई का आदेश दिया। संबंधित थाना प्रभारी को भविष्य में सावधानी बरतने की चेतावनी दी गई। आदेश की प्रति पुलिस कमिश्नर को भेजने के भी निर्देश दिए गए हैं।