फेसबुक पर गलत पोस्ट करने के मामले में हाईकोर्ट ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय अध्यापक संघ के महासचिव डॉ. उमेश प्रताप सिंह को राहत दी है। कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि वह मामले की विवेचना जारी रखें, मगर याची का उत्पीड़न करने वाली कोई कार्रवाई न की जाए। कोर्ट ने राज्य सरकार को इस मामले में तीन सप्ताह में अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है। मामले की सुनवाई चार अगस्त को होगी।
यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता तथा न्यायमूर्ति डॉ. वाईके श्रीवास्तव की खंडपीठ ने उमेश प्रताप सिंह की याचिका पर दिया है। डॉ. उमेश सिंह ने गत दिनों क्वारंटीन सेंटर कोटवा बनी को की व्यवस्था को लेकर फेसबुक पर टिप्पणी की थी। जिस पर स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने पोस्ट को गलत बताते हुए उनके विरुद्ध मुकदमा दर्ज करा दिया था। बाद में उस मुकदमे में धाराएं बढ़ा दी र्गइं, जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।
याची का कहना है कि उसने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के आधार पर फेसबुक पर पोस्ट डाली, जिससे कोई अपराध नहीं बनता। लेकिन, जैसे ही पता चला कि क्वारंटीन सेंटर के व्यक्ति ने पोस्ट का खंडन किया है, तुरंत पोस्ट हटा ली गई ।याची के खिलाफ भारतीय दंड संहिता एवं महामारी (संशोधन) विधेयक 20 के तहत सरायइनायत थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। कोर्ट ने डॉ. उमेश के खिलाफ उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर रोक लगाते हुए पुलिस को विवेचना जारी रखने की छूट दी है।