इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साहिबाबाद इंडस्ट्रियल एरिया में एक प्लॉट पर नाले के ऊपर डाले गए स्लैब को तोड़ने पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने याची से कहा है कि वह स्वयं नाले की सफाई कराने का अपना वादा पूरा करे। तब तक नगर निगम द्वारा कोई कार्रवाई करने पर कोर्ट ने रोक लगा दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति एमके गुप्ता तथा न्यायमूर्ति डॉ वाईके श्रीवास्तव की खंडपीठ ने गाजियाबाद की राज कृष्ण टेक्सटाइल्स व अन्य एवं मेसर्स जैन मार्बल्स सेंटर व अन्य की याचिका पर दिया है ।
याची का कहना है कि नगर निगम गाजियाबाद ने उससे 17 जून 2008 को 28 साल का करार किया है, जिसमें याचीगण को सामने के नाले पर स्लैब लगाकर ढकने एवं पार्किंग के लिए उसका इस्तेमाल करने का लाइसेंस दिया है। याची पर नाले की सफाई की जिम्मेदारी सौंपी गई है। याची लाइसेंस शुल्क जमा कर रहा है। 16 जून 20 को नगर निगम के अधिकारी आए और नाले पर पड़े स्लैब में छेद करने लगे। स्लैब तोड़ने की कार्यवाही की जा रही है, जिसे याचिका में चुनौती दी गई है। याची का कहना है कि उसने अतिक्रमण नहीं किया है। निगम लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन कर रहा है।
निगम की तरफ से कहा गया कि नाले की सफाई में दिक्कत आ रही है और एनजीटी ने ढंके नालों से स्लैब हटाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि याची एनजीटी में पक्षकार नहीं है। कोर्ट ने नगर निगम से सभी दस्तावेज हलफनामे के साथ कोर्ट में दाखिल करने को कहा है और दोनों पक्षों को वायदा पूरा करने का आदेश दिया है। याचिका की अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी।