इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोनभद्र में खनन पट्टों के लिए ई-नीलामी प्रक्रिया में तकनीकी कमियों का हवाला देकर ऊंची बोलीदाताओं को बाहर करने को अनुचित माना। कोर्ट कम बोली लगाने वाले ठेकेदारों के पक्ष में जारी आशय पत्र को रद्द कर दिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोनभद्र में खनन पट्टों के लिए ई-नीलामी प्रक्रिया में तकनीकी कमियों का हवाला देकर ऊंची बोलीदाताओं को बाहर करने को अनुचित माना। कोर्ट कम बोली लगाने वाले ठेकेदारों के पक्ष में जारी आशय पत्र को रद्द कर दिया है।
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कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि प्राकृतिक संसाधनों की नीलामी का मुख्य उद्देश्य राज्य के राजस्व को अधिकतम करना है, न कि तुच्छ तकनीकी आधारों पर निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को दबाना। यह आदेश न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा और न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने मेसर्स कांत कंस्ट्रक्शन कंपनी व अन्य की याचिका पर दिया है।
जिला प्रशासन ने सोनभद्र के विभिन्न क्षेत्रों में खनन पट्टों के लिए 12 जनवरी 2026 को ई-नीलामी की विज्ञप्ति जारी की थी। याचिकाकर्ताओं ने इस प्रक्रिया में भाग लिया और उनकी बोलियां सबसे ऊंची थीं। इसके बावजूद मूल हलफनामा या डिमांड ड्राफ्ट की भौतिक प्रति समय पर जमा न होने और चालान अपलोड न करने जैसी मामूली तकनीकी कमियों को आधार बनाकर उनके आवेदनों को निरस्त कर दिया गया था। उनके स्थान पर कम बोली लगाने वालों को ठेका दे दिया गया था। इसे याचियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
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कोर्ट ने माना कि जब सभी जरूरी दस्तावेज ई-पोर्टल पर पहले ही सफलतापूर्वक अपलोड किए जा चुके थे तो केवल भौतिक सत्यापन की मामूली चूक को निविदा खारिज करने का आधार नहीं बनाया जा सकता था।