अदालतों में ए-फोर साइज के कागज पर दोनों ओर टाइपिंग की अनुमति दिए जाने को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर कोर्ट ने सीधे हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है।
हालांकि मामले की सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा की पीठ ने प्रशासनिक एवं न्यायिक कार्यवाही में ए-4 साइज पेपर पर दोनों तरफ टाइप करने की मांग को प्रशासनिक कार्य करने के लिए विचारणीय माना है। किन्तु अपनी मांग विभागों के समक्ष रखे बगैर सीधे कोर्ट आने के कारण हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है।
कोर्ट ने कहा है कि याची पहले हाईकोर्ट के विभागों से मांग करे यदि मांग नहीं मानी जाती या युक्तिसंगत अवधि के भीतर कोई निर्णय नहीं लिया जाता तो वह दुबारा याचिका दाखिल कर सकता है। याचिका सौमित्र आनंद ने दाखिल की थी। याची का कहना था कि ए-4 साइज पेपर के दोनों तरफ टाइप होने से पेपर की बचत होगी। याचिका में महानिबंधक इलाहाबाद हाईकोर्ट व दो अन्य को पक्षकार बनाया गया था। कोर्ट ने कहा कि प्रशासनिक कार्य के लिए इसे अपनाया जा सकता है।
अभी हाईकोर्ट ए-6 साइज का पेपर इस्तेमाल होता है जिसके एक ही तरफ टाइप करने की छूट है। इसमें काफी कागज की खपत होती है। हाईकोर्ट के विभिन्न अनुभागों में फाइलें रखने की जगह नहीं बची है। ए-4 साइज का कागज अपेक्षाकृत छोटा है और दोनों ओर टाइप करने से आधा कागज ही लगेगा। इससे कागज की भी बचत होगी और रखरखाव की समस्या में भी कमी आएगी।