हाईकोर्ट ने बुलंदशहर दंगे के दौरान इंस्पेक्टर सुबोध सिंह की गोली मारकर हत्या करने के आरोपी सतीश की गिरफ्तारी पर रोक लगाने से इंकार कर दिया है। कोर्ट ने आरोपी को एक सप्ताह में अधीनस्थ न्यायालय में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। सतीश की याचिका पर न्यायमूर्ति एनए मुनीस और न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान ने यह आदेश दिया।
कोर्ट ने आरोपी को एक सप्ताह में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया
सतीश के खिलाफ चार दिसंबर 2018 को स्थान थाना के सबइंस्पेक्टर सुभाष चंद्र ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। उसे इंस्पेक्टर सुबोध की हत्या में नामजद किया गया। याची का कहना था कि प्राथमिकी में अभियुक्त के नाम के साथ उसके पिता का नाम नहीं दिया गया है। इसलिए पुलिस उस इलाके में रहने वाले सतीश नाम के सभी लोगों को परेशान कर रही है, जबकि याची का घटना से कोई लेना देना नहीं है।
याचिका का विरोध कर रहे अपर शासकीय अधिवक्ता एके संड ने कहा कि याची नामजद आरोपी है। इस घटना में दो लोगों की हत्या की गई और तोड़फोड़ कर सरकारी संपत्ति को काफी नुकसान पहुंचाया गया। मामला संगीन है, इसलिए गिरफ्तारी पर रोक लगाने का कोई आधार नहीं है। कोर्ट ने प्राथमिकी रद्द करने से इंकार करते हुए याची को एक सप्ताह में अधीनस्थ न्यायालय में सरेंडर करने का निर्देश दिया है।