इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ग्राम पंचायत सचिव/ग्राम पंचायत अधिकारी आनंद कुमार सोनी के खिलाफ ललितपुर के मुख्य विकास अधिकारी की ओर से पारित 32 लाख 40 हजार रुपये की वसूली के आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि आदेश पारित करते समय प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन किया गया है। यह आदेश न्यायमूर्ति विकास बुधवार की एकल पीठ ने आनंद कुमार सोनी की याचिका पर दिया।
याचिकाकर्ता को 2017 में ग्राम पंचायत अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया था। कुछ कथित चूक के कारण याचिकाकर्ता को दो बार कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे। 20 फरवरी 2025 को उन्हें निलंबित कर दिया गया था जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। कोर्ट ने सात मार्च 2025 को अंतरिम आदेश से बहाल कर दिया। वहीं, चार सितंबर 2025 को मुख्य विकास अधिकारी ने अवैध रूप से 36 घरों के आवंटन से संबंधित एक जांच रिपोर्ट के आधार पर विकास खंड बिरधा के महोली ग्राम पंचायत सचिव से 32 लाख 40 हजार रुपये की वसूली का आदेश पारित किया। इस रिकवरी आदेश को याची ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विभु राय ने दलील दी कि वसूली आदेश पारित करने से पहले याची को न तो कोई नोटिस दिया गया और न ही उनकी सुनवाई हुई।
कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद पाया कि वसूली का आदेश तीन जून 2025 की जांच रिपोर्ट पर आधारित था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद याचिकाकर्ता को नोटिस दिया जाना चाहिए था। नोटिस न दिए जाने को कोर्ट ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन माना और रिकवरी आदेश को रद्द कर दिया। मुख्य विकास अधिकारी को प्राकृतिक न्याय का अनुपालन करने के बाद कानून के अनुसार एक नया आदेश पारित करने का निर्देश दिया गया है।