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हाईकोर्ट ने बिल्डरों और डेवलपर्स के खिलाफ जीडीए द्वारा उठाई गई मांगों को किया खारिज

Tue, 18 Feb 2020 10:59 PM IST
अवधेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
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इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मंगलवार को एक फैसले में कहा कि बिल्डरों और डेवेलॉपर्स से ऊंची सड़क और मेट्रो स्टेशन के मद में बाह्य विकास शुल्क और वर्षा जल संग्रहण प्रणाली के लिए सिक्योरिटी की मांग अवैध है और प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। अदालत ने बिल्डरों और डेवेलॉपर्स से गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) द्वारा की गई मांग रद्द कर दी।
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न्यायमूर्ति पंकज मित्तल और न्यायमूर्ति वीसी दीक्षित की पीठ ने राज नगर एक्सटेंशन (एनएच 58) डेवेलॉपर्स एसोसिएशन, जोकि 25 रीयल एस्टेट डेवलपर्स के सदस्यों वाली एक पंजीकृत सोसाइटी है, की रिट याचिका स्वीकार करते हुए यह व्यवस्था दी।

याचिकाकर्ता जीडीए की इस मांग से परेशान थे क्योंकि सोसाइटी के प्रत्येक सदस्य के नक्शे को मंजूरी देते समय गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने बाह्य विकास शुल्क जमा करने को कहा था जिसमें ऊंची सड़क और मेट्रो स्टेशन के लिए शुल्क और वर्षा जल संचय प्रणाली के लिए सिक्योरिटी शामिल था।
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याचिकाकर्ता की दलील थी कि जीडीए की मांग अवैध है और उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं है क्योंकि व्यक्तिगत तौर पर डेवेलॉपर्स या बिल्डर्स या इस सोसाइटी के सदस्यों का ऊंची सड़क के निर्माण या मेट्रो स्टेशन से कोई लेना देना नहीं है, इसलिए बाह्य विकास शुल्क के मद के तहत उनसे इसकी मांग नहीं की जा सकती।

संबंधित पक्षों के वकीलों की दलील सुनने के बाद पीठ ने कहा कि उत्तर प्रदेश शहरी नियोजन एवं विकास (आकलन, लेवी या विकास शुल्क का संग्रह) नियमों, 2014 के तहत ऊंची सड़क या मेट्रो स्टेशन के संदर्भ में किसी तरह के विकास शुल्क की मांग करने का कोई प्रावधान नहीं है।

अदालत ने कहा कि हमारे समक्ष ऐसा कोई भी प्रावधान प्रस्तुत नहीं किया गया जो विकास प्राधिकरण को ऊंची सड़क और मेट्रो स्टेशन के निर्माण के संदर्भ में विकास शुल्क मांगने के लिए अधिकृत करता हो।

इससे पूर्व, जीडीए की ओर से यह कहते हुए आपत्ति उठाई गई थी कि याचिकाकर्ता के पास इस मांग को चुनौती देने का कोई अधिकार नहीं है, लेकिन अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया।
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