इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजीपुर के एक कब्रिस्तान में निजी व्यक्तियों की ओर से किए गए कथित अतिक्रमण और नमाज पढ़ने में बाधा डालने के खिलाफ दायर जनहित याचिका खारिज कर दी। कहा, निजी व्यक्तियों के खिलाफ इस प्रकार की याचिका विचारणीय नहीं है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजीपुर के एक कब्रिस्तान में निजी व्यक्तियों की ओर से किए गए कथित अतिक्रमण और नमाज पढ़ने में बाधा डालने के खिलाफ दायर जनहित याचिका खारिज कर दी। कहा, निजी व्यक्तियों के खिलाफ इस प्रकार की याचिका विचारणीय नहीं है। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की एकल पीठ ने दिया है।
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याची अशरफ अंसारी की ओर से गाजीपुर के अवथही बसंत, मोहम्मदाबाद में प्लॉट संख्या-31 को लेकर जनहित याचिका दायर की गई थी। याची का आरोप था कि स्थानीय ओम प्रकाश राय व अमित राय ने कब्रिस्तान की जमीन पर अतिक्रमण कर रहे हैं। बांस और लकड़ी के ढांचे खड़े कर मुस्लिम समुदाय को नमाज अदा करने से रोका जा रहा है।
कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि यह विवाद निजी व्यक्तियों के बीच का है। इसमें किसी वैधानिक या सार्वजनिक कर्तव्य का उल्लंघन नहीं पाया गया। इसलिए निजी व्यक्तियों के खिलाफ परमादेश जारी नहीं किया जा सकता। एसडीएम रिपोर्ट में मौके पर किसी भी प्रकार के स्थायी या अस्थायी अतिक्रमण की पुष्टि नहीं हुई।
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कोर्ट ने कहा कि अतिक्रमण और प्रार्थना के अधिकार जैसे मुद्दे तथ्यों के विवादित प्रश्न हैं, जिन्हें रिट अधिकार क्षेत्र के तहत तय नहीं किया जा सकता। राजस्व अभिलेखों में जमीन ईदगाह या मस्जिद के रूप में दर्ज नहीं है, बल्कि कब्रिस्तान के रूप में दर्ज है। याची वहां नमाज पढ़ने का अधिकार जताते हैं तो उन्हें इसे उचित मंच पर साबित करना होगा। कोर्ट ने जनहित याचिका खारिज कर दी। हालांकि, याची को कानून के अनुसार अन्य उपलब्ध कानूनी उपचारों का सहारा लेने की छूट दी है।