इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कौशाम्बी के चर्चित लोहंदा प्रकरण में सैनी थाने में दर्ज आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में तीन के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द करने से इन्कार कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति संजीव कुमार की एकलपीठ ने भूप नारायण पाल और अन्य की याचिका खारिज करते हुए दिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कौशाम्बी के चर्चित लोहंदा प्रकरण में सैनी थाने में दर्ज आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में तीन के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द करने से इन्कार कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति संजीव कुमार की एकलपीठ ने भूप नारायण पाल और अन्य की याचिका खारिज करते हुए दिया है।
विज्ञापन
मामले में अक्षय कुमार तिवारी ने चार जून 2025 को ग्राम प्रधान भूप नारायण पाल समेत तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप था कि चुनावी रंजिश में उनके पिता राम बाबू तिवारी को जहर देकर मार दिया गया। पुलिस ने हत्या की धाराओं में केस दर्ज किया लेकिन विवेचना के दौरान सुसाइड नोट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर इसे आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला माना।
29 जुलाई 2025 को चार्जशीट दाखिल की। आरोपियों ने संज्ञान और समन आदेश को चुनौती देते मुकदमे की पूरी कार्यवाही रद्द करने की मांग में हाईकोर्ट में याचिका दायर की। कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि मजिस्ट्रेट ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर संज्ञान लिया है। इसी के साथ याचिका खारिज कर दी। ऐसे में मामला ट्रायल कोर्ट में विचारण के लिए बना रहेगा।