इलाहाबाद हाईकोर्ट ने औरैया में बस स्टैंड के पास 11 दुकानों और छह मकानों के खिलाफ की गई ध्वस्तीकरण के बदले मुआवजे की मांग में दायर याचिका खारिज कर दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति नीरज तिवारी, न्यायमूर्ति गरिमा प्रशांत की खंडपीठ ने अनिल शुक्ला व अन्य की याचिका पर दिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने औरैया में बस स्टैंड के पास 11 दुकानों और छह मकानों के खिलाफ की गई ध्वस्तीकरण के बदले मुआवजे की मांग में दायर याचिका खारिज कर दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति नीरज तिवारी, न्यायमूर्ति गरिमा प्रशांत की खंडपीठ ने अनिल शुक्ला व अन्य की याचिका पर दिया है।
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याचिकाकर्ताओं ने तिलक नगर, खानपुर स्थित गाटा संख्या 294/1 पर संपत्तियों के नुकसान के लिए शासन से गुहार लगाई थी। सुनवाई न होने पर हाईकोर्ट में याचिका दायर की। नगर पालिका परिषद औरैया के अधिवक्ता अभिषेक सरोज व उप्र एसआरटीसी के अधिवक्ता एके सक्सेना ने दलील दी कि इसी विवादित भूमि के संबंध में याचियों के पिता की ओर से 1997 में दायर एक सिविल सूट पहले ही 12 अगस्त 2024 को खारिज किया जा चुका है। उसके विरुद्ध लंबित अपील में फिलहाल, कोई अंतरिम स्थगन आदेश प्रभावी नहीं है।
याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि वह पुराना मुकदमा वर्तमान भूमि के पास स्थित दूसरी जमीन से संबंधित था। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद और रिकॉर्ड का अवलोकन कर कहा कि यह मामला पूरी तरह से तथ्यों के विवाद से जुड़ा है। इसका फैसल याचिका में नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर कोर्ट ने याचिका खारिज कर याचिकाकर्ताओं को कानून के तहत उपलब्ध अन्य उचित कानूनी उपचारों को अपनाने की छूट प्रदान की है।