इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी विकास प्राधिकरण की ओर से दालमंडी में मकान तोड़ने के लिए जारी नोटिस पर रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह की खंडपीठ ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जब तक विकास प्राधिकरण याचिकाकर्ताओं की आपत्तियों का निस्तारण नहीं कर देता, तब तक संबंधित पक्ष यथास्थिति बनाए रखेंगे।
परवीन फातिमा और तीन अन्य व्यक्तियों ने याचिका दायर कर वाराणसी विकास प्राधिकरण की ओर से जारी नोटिस को चुनौती दी थी। अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि याची हाउस नंबर सीके 39/2, दालमंडी, वार्ड चौक, वाराणसी के मालिक हैं। वर्षों से वहां निवास कर रहे हैं। उनकी संपत्ति का निर्माण काफी पुराना है। पहले कभी इस संबंध में कोई आपत्ति नहीं जताई गई थी। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि विकास प्राधिकरण मनमाने तरीके से कार्रवाई कर रहा है, ताकि उन्हें उनकी अधिग्रहित संपत्ति का उचित मुआवजा न देना पड़े।
प्राधिकरण के वकील ने दलील दी कि यह याचिका समय से पहले दायर की गई है। क्योंकि, याचिकाकर्ताओं ने अभी तक अपनी औपचारिक आपत्तियां दर्ज नहीं कराई हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि याची अपनी आपत्तियां प्रस्तुत करते हैं तो प्राधिकरण कानून के दायरे में रहकर उन पर विचार करने को तैयार है।