इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 16 सप्ताह की गर्भवती नाबालिग पीड़िता के मामले में पीलीभीत के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को मेडिकल बोर्ड गठित करने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने पीड़िता की मां की याचिका पर दिया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 16 सप्ताह की गर्भवती नाबालिग पीड़िता के मामले में पीलीभीत के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को मेडिकल बोर्ड गठित करने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने पीड़िता की मां की याचिका पर दिया।
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पीड़िता की मां ने बेटी के गर्भ को समाप्त कराने की अनुमति मांगी थी। आरोप लगाया था कि इस संबंध में स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क किया गया पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस पर कोर्ट ने पीलीभीत के सीएमओ को आदेश दिया है कि दो दिन में मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) एक्ट के तहत एक मेडिकल बोर्ड का गठन किया जाए। बोर्ड पीड़िता की चिकित्सीय जांच कर बताए कि गर्भ का समापन संभव है या नहीं।
कोर्ट ने यह भी कहा है कि सीएमओ पीड़िता से अकेले में बातचीत कर उसकी इच्छा का पता लगाएं, जिसे लिखित रूप में दर्ज कर सीलबंद लिफाफे में पेश करें। जिला मजिस्ट्रेट और संबंधित जांच अधिकारी को निर्देश दिया कि वे पीड़िता को अस्पताल तक लाने-ले जाने में मदद करें। इस प्रक्रिया का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। 17 अप्रैल को मामले की सुनवाई होगी।