इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ग्रेच्युटी भुगतान न होने की शिकायत पर दायर याचिका का निस्तारण करते हुए उच्च शिक्षा निदेशक को चार महीने में निर्णय लेने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि याचियों की मांग पर सीधे आदेश देने के बजाय सक्षम प्राधिकारी की ओर से विचार किया जाना उचित होगा।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ग्रेच्युटी भुगतान न होने की शिकायत पर दायर याचिका का निस्तारण करते हुए उच्च शिक्षा निदेशक को चार महीने में निर्णय लेने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि याचियों की मांग पर सीधे आदेश देने के बजाय सक्षम प्राधिकारी की ओर से विचार किया जाना उचित होगा।
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यह आदेश न्यायमूर्ति दिनेश पाठक की एकलपीठ ने आजमगढ़ के डॉ. अब्दुल हन्नान व 22 अन्य की ओर से दायर याचिका पर दिया। याचियों की ओर से कहा गया कि उन्हें लंबे समय से देय ग्रेच्युटी का भुगतान नहीं किया गया है। जबकि इस संबंध में कई बार प्रार्थना पत्र भी दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
राज्य की ओर से पेश स्थायी अधिवक्ता ने दलील दी कि याचियों की शिकायत का समाधान उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा निदेशक स्तर पर किया जा सकता है। इस पर कोर्ट ने याचियों को तीन सप्ताह के भीतर नया प्रत्यावेदन देने की छूट दी। साथ ही कोर्ट ने निर्देश दिया कि वह याचियों के प्रत्यावेदन पर कानून के अनुसार विचार करते हुए, प्रमाणित प्रति प्रस्तुत होने की तिथि से चार महीने के भीतर निर्णय लें। बशर्ते कोई कानूनी बाधा न हो।