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हाईकोर्ट का आदेश : यूपीटीईटी-2026 के दो विवादित सवाल मूल्यांकन से बाहर किए जाएं

Sat, 31 Oct 2026 04:10 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी)-2026 के दो विवादित सवालों को मूल्यांकन से बाहर करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि जिन सवालों के दो विकल्पों को आयोग ने सही माना था।
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परीक्षा। - फोटो : अमर उजाला
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी)-2026 के दो विवादित सवालों को मूल्यांकन से बाहर करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि जिन सवालों के दो विकल्पों को आयोग ने सही माना था, उन पर केवल कुछ अभ्यर्थियों को अंक देना उचित नहीं है। ऐसे सवालों को मूल्यांकन से हटाकर सभी प्रभावित अभ्यर्थियों को समान लाभ मिलना चाहिए। न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने कानपुर नगर निवासी विजय सोनकर व तीन अन्य की याचिका पर यह आदेश दिया।

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कोर्ट ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को यूपीटीईटी-2026 के मास्टर सेट के प्रश्न संख्या 36 और 37 को मूल्यांकन से बाहर करने का आदेश दिया है। सभी प्रभावित अभ्यर्थियों को इन सवालों का समान लाभ देने को कहा है। आयोग को याचियों के अंक दोबारा निर्धारित कर परिणाम और स्कोरकार्ड में सुधार करने का आदेश भी दिया है।

याचियों की दलील थी कि आयोग ने अंतिम उत्तर कुंजी में प्रश्न संख्या 36 के विकल्प बी और डी, तथा प्रश्न संख्या 37 के विकल्प ए और डी को सही माना था। इसके बावजूद, केवल उन्हीं अभ्यर्थियों को अंक मिले जिन्होंने स्वीकार किए गए विकल्पों में से एक को चुना था। उनका तर्क था कि दो सही उत्तर स्वीकार होने पर सवाल को मूल्यांकन से हटाना चाहिए। आयोग ने कहा कि याचियों ने सही विकल्प नहीं चुने थे और प्रोविजनल उत्तर कुंजी पर आपत्ति भी नहीं की थी।
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कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद स्पष्ट किया कि यूपीटीईटी एक अर्हकारी परीक्षा है। दो सही विकल्प स्वीकार किए जाने के बाद ऐसे सवालों का मूल्यांकन करना उचित नहीं है। कोर्ट ने यह भी ध्यान दिया कि आयोग ने इसी परीक्षा में प्रश्न संख्या 38 को पहले ही मूल्यांकन से बाहर कर दिया है। ऐसे में प्रश्न संख्या 36 और 37 के साथ अलग व्यवहार करने का कोई तार्किक आधार नहीं है। दोनों सवाल हटाए जाने के बाद प्रश्नपत्र 150 के बजाय 148 सवालों का माना जाएगा। निर्धारित प्रतिशत के आधार पर अर्हता अंक की गणना की जाएगी। इसी के साथ याचिका निस्तारित कर दी।

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