बीमारी के कारण उनकी सेवाएं 2015 में समाप्त कर दी गईं, जिसके खिलाफ अपील दाखिल की गई थी। अपील के लंबित रहने के दौरान वर्ष 2020 में उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद हाइकोर्ट के निर्देश पर सेवानिवृत्त देयकों का भुगतान 18 मार्च 2024 को कर दिया गया, लेकिन याची की ओर से बेटे को मृतक आश्रित कोटे की नौकरी देने का दावा करते हुए प्रतिवेदन दिया गया। वह अभी भी लंबित है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सड़क परिवहन निगम प्रयागराज को मृतक परिचालक के बेटे को मृतक आश्रित कोटे की नौकरी के दावे को एक माह में निस्तारित करने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अजीत कुमार की अदालत ने दिया है। याची के अधिवक्ता सुनील चौधरी ने दलील दी कि याची के पति केसर जावेद आजमी परिवहन निगम में परिचालक के पद पर कार्यरत थे।
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बीमारी के कारण उनकी सेवाएं 2015 में समाप्त कर दी गईं, जिसके खिलाफ अपील दाखिल की गई थी। अपील के लंबित रहने के दौरान वर्ष 2020 में उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद हाइकोर्ट के निर्देश पर सेवानिवृत्त देयकों का भुगतान 18 मार्च 2024 को कर दिया गया, लेकिन याची की ओर से बेटे को मृतक आश्रित कोटे की नौकरी देने का दावा करते हुए प्रतिवेदन दिया गया। वह अभी भी लंबित है।
इसके विपरीत सरकारी अधिवक्ता ने तर्क दिया कि मृत्यु के समय याची के पति सेवा में नही थे, इसलिए याची के बेटे को मृतक आश्रित कोटे में नौकरी नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने याचिका निस्तारित करते हुए परिवहन विभाग के क्षेत्रीय प्रबंधक को याची के लंबित प्रत्यावेदन को एक माह में निस्तारित करने का आदेश दिया है।